चुप्पी जो टूटी तो कई जलजले आयेंगे...
गुमशुदा से पल ज़िन्दगी में चले आयेंगे...
इरादे न थे घायल हों शेरों-सुख़न अपने...
रिश्तों के जंगल सारे आँख मले आयेंगे...
बेखौफ़ मोहब्बतों के तराने सुने नहीं गये...
फ़लसफ़े झूठे आँख बचा के साँझ ढले आयेंगे...
गुमशुदा से पल ज़िन्दगी में चले आयेंगे...
इरादे न थे घायल हों शेरों-सुख़न अपने...
रिश्तों के जंगल सारे आँख मले आयेंगे...
बेखौफ़ मोहब्बतों के तराने सुने नहीं गये...
फ़लसफ़े झूठे आँख बचा के साँझ ढले आयेंगे...
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