इन्द्रधनुष के पाँवों चलने वाले हैं
ताल तलैए प्यासे काग़ज़ की नावों के
बौछारों में बच्चे हैं मतवाले हैं
सोंधी मिट्टी की खुशबू पुरुवाई में
बस्ती वाले मूड बदलने वाले हैं
पिछले मौसम अगले मौसम सब भीगे से
बात छिड़ी है उफने नद्दी नाले हैं
पनघट वाले जमघट यूँ तो उड़न छू हुए
घिर घिर बरसे याद चाय के प्याले हैं
Bohat achha laga padhke sir ...
जवाब देंहटाएंthanks a lot pinky
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