शोर उठकर भीड़ में थमता रहा है
जो करे मैं मैं वही तनहा रहा है
वक्त का चप्पू कभी रुकता नहीं है
छूटने के दर्द में कुछ आ रहा है
बहुत थी तकलीफ़ तो छूटा नहीं कुछ
राहतों में हर तरफ़ शुबहा रहा है
मत बना मीनार का झंडा हमें अब
देख ले सबको बड़प्पन खा रहा है
ताल पर थिरकें सभी संगत वही दे
मंडली को तोड़ दें उकसा रहा है?
जो करे मैं मैं वही तनहा रहा है
वक्त का चप्पू कभी रुकता नहीं है
छूटने के दर्द में कुछ आ रहा है
बहुत थी तकलीफ़ तो छूटा नहीं कुछ
राहतों में हर तरफ़ शुबहा रहा है
मत बना मीनार का झंडा हमें अब
देख ले सबको बड़प्पन खा रहा है
ताल पर थिरकें सभी संगत वही दे
मंडली को तोड़ दें उकसा रहा है?
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