उनके बिन बेरंग मुंडेरें, सस्ता है वो गाँव
ईंटों वाली दीवारों में नाम खुदे थे धुँधले से
चढ़े पलस्तर दफ़न मोहब्बत लौटा उल्टे पाँव
साक्षी थे गुमनाम मिलन के आहिस्ते से मिटे निशाँ
वन विभाग ही काट ले गया रस्तों वाली छाँव
नई पौध है इनके लिए कहानी जैसी सारी बातें
आयेगा वो कह हँसते जब कागा बोले काँव
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