बारिश की चादर ओढ़े ये अपार्टमेन्ट हैं
गीली सड़कें काँप रही हैं नो कमेन्ट हैं
ऑटो रिक्शा खाली दौड़े भागे जाते
दूर शहर के बाहर उनके कहीं टेन्ट हैं
भूखे लोग हज़ारों अब भी शहर में धँसे
बेघर उम्मीदों के चेहरे पुते पेन्ट हैं
फुटपाथों पे बुल्डोज़र आये मँडराये
घर होना बेहद मुश्किल है बहुत रेन्ट है
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