उसको जीने की अदम्य इच्छा कहते हैं
जो डरे बिना तूफ़ां को डँटकर सहते हैं
ये सूरज-चाँद उन्हीं में सिमटे जाते हैं
हर जोड़-घटाना से ऊपर वो रहते हैं
सौ-सौ बार उजड़कर बसना उनसे सीखो
सब बिखरे हुए गणित के पेज़ सिमटते हैं
हैं उम्मीदों के गीत से उड़ीं उनकी नींदे
वो खौ़फ़ज़दा हैं बिना ढहाये ढहते हैं...
सौ-सौ बार उजड़कर बसना उनसे सीखो
जवाब देंहटाएंसब बिखरे हुए गणित के पेज़ सिमटते हैं
अच्छी पंक्तिया ........
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आपने भी कभी तो जीवन में बनाये होंगे नियम ??