सोमवार, 21 जून 2010


सयाने लोग हँसकर ही मिलेंगे...
छलेंगे फूल झूठे जब खिलेंगे...

उन्हें लगता रहा है वो मसीहा...
मगर हम उग रहे हैं वो हिलेंगे...

अभी जो बीज हैं कल पेड़ होंगे...
छाँव देंगे धूप में जब वो जलेंगे...

बहुत है दंभ उनको शख्सीयत हैं...
सच है कि उनके बाद भी चेहरे ढलेंगे...

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