सोमवार, 24 मई 2010


धूप लगती नहीं..
.प्यास घटती नहीं...
आस छँटती नहीं...
याद हटती नहीं...
लगता है इश्क़ हो गया है...

बस्तियाँ सूनी लगें...
कश्तियाँ धीमी लगें...
आहटें चीरें कलेजा...
नज़र बँटती नहीं...
लगता है इश्क हो गया है...

चाह जगने लगी...
रात ठगने लगी...
साँस थमने लगी...
तड़प कपटी नहीं...
लगता है इश्क हो गया है...

शर्म अँगने लगी...
देह जमने लगी...
सृष्टि बनने लगी...
आग मिटती नहीं...
लगता है इश्क़ हो गया है...

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