शुक्रवार, 4 जून 2010


बत्तियों का शहर उजली हस्तियों का शहर है ये...
भूख बेइज़्ज़त यहाँ है मस्तियों का शहर है ये...

जिधर देखो भीड़ का गहरा समन्दर चल रहा है...
ख्वाब की अनगिनत डूबी कश्तियों का शहर है ये...

गगनचुम्बी घरों के नीचे पड़े दिलजले कितने...
रह रहे हैं पर पराई बस्तियों का शहर है ये...

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