मौसम कड़वे घूरे होंगे...
अभी न छंद अधूरे होंगे...
दर्दीली धुन कहीं उठी है...
मालिक नहीं मजूरे होंगे...
नींव खुरदुरी ही होती है...
वो शायद कंगूरे होंगे...
घायल हसरत खोये सपने...
गली हड्डियाँ चूरे होंगे...
इनको तो अब जलना ही है...
जल जल अरमां पूरे होंगे...
हरियाली जिनसे आयेगी...
वो तो बादल भूरे होंगे..
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