शनिवार, 8 मई 2010

कैलकुलस की कक्षा थी वो
मास्टर जी को बुरा लगा था...

चौथी बेंच पे संगी सारे
हँसी उठी थी राग जगा था...

हॉस्टल के पिछवाड़े कोई
प्रेम कहानी पनप गई थी...

मास्टर जी कुछ समझ सके ना
इतने गहरे राज़ ठगा था...

एक सुबह अखबार में पढ़ा
सबने फिर चटखारे लेकर...

नदिया में दो लाश मिली थी
संशय मन में जाग उगा था...

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