कैलकुलस की कक्षा थी वो
मास्टर जी को बुरा लगा था...
चौथी बेंच पे संगी सारे
हँसी उठी थी राग जगा था...
हॉस्टल के पिछवाड़े कोई
प्रेम कहानी पनप गई थी...
मास्टर जी कुछ समझ सके ना
इतने गहरे राज़ ठगा था...
एक सुबह अखबार में पढ़ा
सबने फिर चटखारे लेकर...
नदिया में दो लाश मिली थी
संशय मन में जाग उगा था...
मास्टर जी को बुरा लगा था...
चौथी बेंच पे संगी सारे
हँसी उठी थी राग जगा था...
हॉस्टल के पिछवाड़े कोई
प्रेम कहानी पनप गई थी...
मास्टर जी कुछ समझ सके ना
इतने गहरे राज़ ठगा था...
एक सुबह अखबार में पढ़ा
सबने फिर चटखारे लेकर...
नदिया में दो लाश मिली थी
संशय मन में जाग उगा था...
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