भाग रहा है वक्त पकड़ से छूटीं यादें...
इतना सब कुछ हुआ कि ओझल हैं फ़रियादें...
बहुत शिकायत थी लड़ना था मुद्दे जागे...
आगे जो ढहते देखा वो झूठे वादे...
मलबे में भी बहुत सिसकियाँ जमी हुई थीं...
दफ़न हुए इतिहास में सदा छोटे प्यादे...
बीत गया सो बीत गया के नारे आगे...
कल के हत्यारे कुर्सी पे कूदे- फाँदे...
खून पसीना शोभा देता प्रजा जनों पे...
जिनके पंजे दहशत वाले वो शहज़ादे...
घबराहट है अकुलाहट है मंज़र बदले...
छले जा रहे लोग हमेशा सीधे - सादे...
इतना सब कुछ हुआ कि ओझल हैं फ़रियादें...
बहुत शिकायत थी लड़ना था मुद्दे जागे...
आगे जो ढहते देखा वो झूठे वादे...
मलबे में भी बहुत सिसकियाँ जमी हुई थीं...
दफ़न हुए इतिहास में सदा छोटे प्यादे...
बीत गया सो बीत गया के नारे आगे...
कल के हत्यारे कुर्सी पे कूदे- फाँदे...
खून पसीना शोभा देता प्रजा जनों पे...
जिनके पंजे दहशत वाले वो शहज़ादे...
घबराहट है अकुलाहट है मंज़र बदले...
छले जा रहे लोग हमेशा सीधे - सादे...
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