बादल तो बरसेंगे उनका क्या...
छतरी ले चुपके से मिलने आ...
मौसम तो आयेंगे जायेंगे...
यादों के बादल सा तू भी छा...
गूँगी सी बस्ती है सदियों से...
बोलेगी संग-साथ खुल के गा...
चमड़ी से गोरी तो दुनिया है...
जाने दे तू तो बस मन को भा...
रंज़ोगम भूलें आ थिरकें हम...
अँजुरी में उग आया सपना सा...
छतरी ले चुपके से मिलने आ...
मौसम तो आयेंगे जायेंगे...
यादों के बादल सा तू भी छा...
गूँगी सी बस्ती है सदियों से...
बोलेगी संग-साथ खुल के गा...
चमड़ी से गोरी तो दुनिया है...
जाने दे तू तो बस मन को भा...
रंज़ोगम भूलें आ थिरकें हम...
अँजुरी में उग आया सपना सा...
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