एक कोना और देना, तितलियों के पर लगे बढ़ने...
एक लमहा आसमानी हम चले हैं फ़्रेम में मढ़ने...
हर इबारत अधलिखी है शब्द हैं अनजान भाषा से...
अक्षरों से परे आहट आ रही नजदीकियाँ पढ़ने...
हर खबर दुख दर्द सारा बाँटना हैं खुशी सारी...
इश्क की महफ़िल लगी है प्यार के जुमले नये गढ़ने
अनगिनत दीवार मुल्कों की खिंची हैं सोच की सीमा...
सिरफ़िरे फिर भी बढ़े अपनत्व की हर सीढ़ियाँ चढ़ने...
एक लमहा आसमानी हम चले हैं फ़्रेम में मढ़ने...
हर इबारत अधलिखी है शब्द हैं अनजान भाषा से...
अक्षरों से परे आहट आ रही नजदीकियाँ पढ़ने...
हर खबर दुख दर्द सारा बाँटना हैं खुशी सारी...
इश्क की महफ़िल लगी है प्यार के जुमले नये गढ़ने
अनगिनत दीवार मुल्कों की खिंची हैं सोच की सीमा...
सिरफ़िरे फिर भी बढ़े अपनत्व की हर सीढ़ियाँ चढ़ने...
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